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मुकाबला महिला उम्मीदवारों के ही बीच

09/10/2019

मुकाबला महिला उम्मीदवारों के ही बीच

शैलेन्द्र पाण्डेय

क्षिण बस्तर के धुर नक्सली क्षेत्र दंतेवाड़ा का विधानसभा उपचुनाव भाजपा और कांग्रेस, दोनों के लिए प्रतिष्ठापूर्ण है। सत्ता में आने के बाद कांग्रेस और 15 साल की सरकार गंवाने के बाद भाजपा पहली बार इस उपचुनाव में आमने-सामने हैं। माना जा रहा है कि भाजपा से ओजस्वी मंडावी, और कांग्रेस की देवती कर्मा के बीच ही कड़ी टक्कर है। आम आदमी पार्टी यानी आप से बल्लू भवानी, जोगी कांग्रेस से सुमित कर्मा, एन.सी.पी. से अजय कुमार एवं गोंड़वाना गणतंत्र पार्टी से योगेश मरकाम के वोट कटवा तक ही रहने के कयास लगाये जा रहे हैं। कमोबेश 1 लाख 88 हजार मतदाताओं वाले क्षेत्र में महिलाओं की तादाद अधिक होने से नारी शक्ति की भूमिका अहम होगी।

निर्वाचन कार्यक्रम के मुताबिक 23 सितंबर को मतदान होगा एवं 27 सितंबर को मतगणना की जायेगी। मुकाबले की प्रमुख उम्मीदवार देवती और ओजस्वी, दोनों ने ही नक्सली हमले में अपने को खोने का हौलनाक मंजर देखा है। वर्ष 2013 में कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे महेन्द्र कर्मा एवं वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान श्यामगिरी नक्सली हमले में भाजपा के विधायक भीमा मंडावी मारे गये थे। एक तरह से यह उपचुनाव नक्सलवाद के खिलाफ, शहादत के वर्चस्व की लड़ाई है। इस चुनाव में बस्तर में दशकों से खनिज संसाधनों की लूट, नक्सलवाद, आदिवासियों पर हो रहे अत्याचार, नंदराज पहाड़ और भ्रष्टाचार मुख्य मुद्दे हैं। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से हरी झंडी मिलने के बाद राजनाथ सिंह, अमित शाह, जे.पी.नड्डा, डॉ. रेणुका सिंह, डॉ रमन सिंह, सरोज पांडे एवं अन्य नेताओं के प्रचार प्रसार से भाजपा के जनाधार में इजाफा हो सकता है।

वास्तव में दंतेवाड़ा उपचुनाव का परिदृश्य वर्ष 2008 के विधान सभा चुनाव से आपसी बदलाव के साथ जारी है। उस वक्त महेन्द्र कर्मा और भीमा मंडावी के बीच हुए मुकाबले में भीमा ने कांग्रेस के अभेद्य किले को ढहाकर पहली बार भाजपा का परचम लहराया था।

वहीं कांग्रेस ने कमान स्थानीय नेताओं के हाथ में ही रखी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम, मंत्रियों में टी.एस.सिंहदेव ताम्रध्वज साहू, कवासी लखमा, सांसद दीपक बैज एवं प्रदेश संगठन के नेताओं ने चुनाव जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। वास्तव में दंतेवाड़ा उपचुनाव का परिदृश्य वर्ष 2008 के विधान सभा चुनाव से आपसी बदलाव के साथ जारी है। उस वक्त महेन्द्र कर्मा और भीमा मंडावी के बीच हुए मुकाबले में भीमा ने कांग्रेस के अभेद्य किले को ढहाकर पहली बार भाजपा का परचम लहराया था। फिर वर्ष 2013 में कर्मा के शहीद होने के बाद सहानुभूति लहर में भीमा को हराकर देवती कर्मा पहली बार विधायक निर्वाचित हुई थीं। तत्पश्चात वर्ष 2018 में भीमा ने कड़ी मशक्कत के बाद देवती को मात्र 2100 के अंतर से पटकनी दी। मगर लोकसभा चुनाव के दौरान आईईडी ब्लास्ट में भीमा के शहीद होने से यह सीट रिक्त हो गई।

उत्तराधिकारी के रूप में उनकी पत्नी ओजस्वी को अब टिकट दी गई है। दोनों राजनीतिक दलों से महिला प्रत्याशी उतारे जाने पर माहौल दिलचस्प हो गया है। संभावना व्यक्त की जा रही है कि ओजस्वी को सहानुभूति लहर का फायदा मिल सकता है। ज्ञातव्य है कि बस्तर संभाग के 12 विधानसभा सीटों में एकमात्र दंतेवाड़ा सीट ही भाजपा के खाते में आयी थी। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह कहते हैं कि कांग्रेस सरकार बनने के बाद नक्सलवाद पर कोई स्पष्ट नीति नहीं बनायी गयी है। पिछले आठ महीने के कार्यकाल में सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है। कांग्रेस सरकार पूरी तरह से दिवालियापन के कगार पर है। उन्होंने दावा किया कि यह उपचुनाव भाजपा ही जीतेगी। इसके पलटवार में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दावा करते हैं कि चुनाव पूर्व किए वादों को कांग्रेस सरकार ने पूरा किया है।

धान खरीदी समर्थन मूल्य 2500 रुपये, सभी किसानों का कर्जा माफ आदिवासियों के जमीन की वापसी, वनाधिकार पट्टा, बिजली बिल हाफ, तेंदूपत्ता की दर 2500 से बढ़ाकर 4000 रुपये करना सरकार के कामों में शामिल है। वे पिछले 15 साल की रमन सरकार के कार्यकाल में विकास के नाम पर कथित भ्रष्टाचार एवं शोषण को भी गिनाते हैं। बहरहाल आरोप- प्रत्यारोप के बीच दंतेवाड़ा उपचुनाव किस करवट बैठेगा, यह तो आने वाला वक्त ही तय करेगा।


 
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